शनि चालीसा दिलाए-शनि साढ़े साती और शनि ढैय्या से मुक्ति SHANI CHALISA – Simple way to RELIEF FROM SADHE SATI & DHAIYA 

शनि चालीसा दिलाए–शनि साढ़े साती और शनि ढैय्या से मुक्ति SHANI CHALISA- RELIEF FROM SADHE SATI & DHAIYA 

शनि की कोई भी दशा हो चाहे – हिंदू धर्म में शनि देव को न्याय के देवता के रूप में जाना / पूजा जाता है। ऐसी मान्यता है कि शनि देव की उपासना करने से साधक को सभी कष्टों से मुक्ति प्राप्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। शनि देव लोगों को उनके कर्मों ( अच्छा या बुरा ) का फल देते हैं।शनि साढेसाती (Shani Sadhe Saati) हो या शनि की ढैय्या (Shani Dhaiya) का नाम सुनते ही लोग घबरा जाते हैं। जिन लोगों पर शनि की दशा चल रही होती है उन्हें दशा से मुक्ति पाने के लिए शनि चालिसा का नियमित पाठ अवश्य करना चाहिए।

शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए शनिवार के दिन शनि चालिसा का पाठ करना चाहिए। शनिवार का दिन शनि देव की उपासना के लिए सबसे श्रेष्ठ माना जाता है। शनि चालीसा का पाठ शनि मंदिर में, पीपल के पेड़ के नीच बैठकर करना बहुत शुभ होता है। आप यह पाठ श्याम के समय घर के मंदिर में भी कर सकते हैं ।इस दौरान कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना चाहिए।

शनि दोष व उसके अशुभ प्रभाव से बचने के लिए इस प्रकार करें शनि चालीसा के पाठ

वैसे तो शनि चालीसा का पाठ हर रोज़ किया जा सकता है। यदि ऐसा ना हो पाए तो शनिवार के दिन शनि मन्दिर में या पीपल के वृक्ष के नीचे शनि चालीसा का पाठ करें।

जिनकी कुंडली में शनि की साढ़ेसाती / ढैय्या या शनि दोष हो उन्हें भी शनिवार को शनि मंदिर जा कर शनि चालिसा का पाठ करना चाहिए।साथ ही साथ घर के मंदिर में सरसों के तेल का दीपक जलाएं और शांत मन से शनि चालीसा का पाठ करें ।ऐसा करने से शनि देव अवश्य प्रसन्न होते हैं।

 शनि चालीसा  के नियम

यदि आप अपनी कुंडली में शनिदेव की स्थिति मजबूत कर उनकी शुभ दृष्टि चाहते है तो शनि चालिसा का पाठ नियम पूर्वक करना अती उत्तम रहता है। पाठ करते समय कुछ बातों का ध्यान रखना बहुत आवश्यक होता है ।

  • ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनिवार की सुबह जल्दी उठकर नहा-धो कर साफ सुथरे कपड़े पहने। इसके बाद शनि मंदिर में जाए।
  • मंदिर में शनिदेव को सरसों का तेल व काले तिल अर्पित करें।
  • शनिदेव की पूजा करें व चलिसा का पाठ करें ।
  • ध्यान रहे शनिदेव के समक्ष हमेशा नज़रे नीचे रखें। भूलकर भी उनकी आखों में नहीं देखे।
  • ऐसा कहा जाता है कि यदि 40 शनिवार, शनि चालीसा का पाठ किया जाए तो सुख- समृद्धि आती है।

शनि चालीसा

शनि चालीसा SHANI CHALISA 

दोहा

जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल करण कृपाल।

दीनन के दुख दूर करि, कीजै नाथ निहाल॥

जय जय श्री शनिदेव प्रभु, सुनहु विनय महाराज।

करहु कृपा हे रवि तनय, राखहु जन की लाज॥

चौपाई

जयति जयति शनिदेव दयाला। करत सदा भक्तन प्रतिपाला॥

चारि भुजा, तनु श्याम विराजै। माथे रतन मुकुट छवि छाजै॥

परम विशाल मनोहर भाला। टेढ़ी दृष्टि भृकुटि विकराला॥

कुण्डल श्रवण चमाचम चमके। हिये माल मुक्तन मणि दमके॥

कर में गदा त्रिशूल कुठारा। पल बिच करैं अरिहिं संहारा॥

पिंगल, कृष्णो, छाया नन्दन। यम, कोणस्थ, रौद्र, दुखभंजन॥

सौरी, मन्द, शनी, दश नामा। भानु पुत्र पूजहिं सब कामा॥

जा पर प्रभु प्रसन्न ह्वैं जाहीं। रंकहुँ राव करैं क्षण माहीं॥

पर्वतहू तृण होई निहारत। तृणहू को पर्वत करि डारत॥

राज मिलत बन रामहिं दीन्हयो। कैकेइहुँ की मति हरि लीन्हयो॥

बनहूँ में मृग कपट दिखाई। मातु जानकी गई चुराई॥

लखनहिं शक्ति विकल करिडारा। मचिगा दल में हाहाकारा॥

रावण की गति–मति बौराई। रामचन्द्र सों बैर बढ़ाई॥

दियो कीट करि कंचन लंका। बजि बजरंग बीर की डंका॥

नृप विक्रम पर तुहि पगु धारा। चित्र मयूर निगलि गै हारा॥

हार नौलखा लाग्यो चोरी। हाथ पैर डरवायो तोरी॥

भारी दशा निकृष्ट दिखायो। तेलिहिं घर कोल्हू चलवायो॥

विनय राग दीपक महं कीन्हयों। तब प्रसन्न प्रभु ह्वै सुख दीन्हो॥

हरिश्चन्द्र नृप नारि बिकानी। आपहुं भरे डोम घर पानी॥

तैसे नल पर दशा सिरानी। भूंजी–मीन कूद गई पानी॥

श्री शंकरहिं गह्यो जब जाई। पारवती को सती कराई॥

तनिक विलोकत ही करि रीसा। नभ उड़ि गयो गौरिसुत सीसा॥

पाण्डव पर भै दशा तुम्हारी। बची द्रौपदी होति उघारी॥

कौरव के भी गति मति मारयो। युद्ध महाभारत करि डारयो॥

रवि कहँ मुख महँ धरि तत्काला। लेकर कूदि परयो पाताला॥

शेष देव–लखि विनती लाई। रवि को मुख ते दियो छुड़ाई॥

वाहन प्रभु के सात सुजाना। जग दिग्गज गर्दभ मृग स्वाना॥

जम्बुक सिंह आदि नख धारी। सो फल ज्योतिष कहत पुकारी॥

गज वाहन लक्ष्मी गृह आवैं। हय ते सुख सम्पति उपजावैं॥

गर्दभ हानि करै बहु काजा। सिंह सिद्ध कर राज समाजा॥

जम्बुक बुद्धि नष्ट कर डारै। मृग दे कष्ट प्राण संहारै॥

जब आवहिं प्रभु स्वान सवारी। चोरी आदि होय डर भारी॥

तैसहि चारि चरण यह नामा। स्वर्ण लौह चाँदी अरु तामा॥

लौह चरण पर जब प्रभु आवैं। धन जन सम्पत्ति नष्ट करावैं॥

समता ताम्र रजत शुभकारी। स्वर्ण सर्व सुख मंगल भारी॥

जो यह शनि चरित्र नित गावै। कबहुं न दशा निकृष्ट सतावै॥

अद्भुत नाथ दिखावैं लीला। करैं शत्रु के नशि बलि ढीला॥

जो पण्डित सुयोग्य बुलवाई। विधिवत शनि ग्रह शांति कराई॥

पीपल जल शनि दिवस चढ़ावत। दीप दान दै बहु सुख पावत॥

कहत राम सुन्दर प्रभु दासा। शनि सुमिरत सुख होत प्रकाशा॥

 

दोहा

पाठ शनिश्चर देव को, की हों ‘भक्त’ तैयार।

करत पाठ चालीस दिन, हो भवसागर पार॥

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शनि चालीसा के फायदे BENEFITS OF SHANI CHALISA 

शनि चालीसा करने से घर में धन की कमी नहीं होती, सुख- समृद्धि आती है। आपके विचारों में निखार आता है और जीवन में दृष्टि की स्पष्टता आती है। शास्त्रों अनुसार जब शनि देव किसी पर प्रसन्न होते हैं तो जातक के सभी कष्ट दूर कर देते हैं। शनि महाराज का आशीर्वाद पाने के लिए शनि चालीसा का पाठ बहुत ही श्रेष्ठ उपाय है। शानि देव को प्रसन्न करने व जातक की सभी परेशानियां दूर के लिए शनि चालीसा का पाठ किया जाता है। 

शनि देव का बीज मंत्र  “ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।”

 इन मंत्रों का जाप करने से शनि देव प्रसन्न होते है और भक्तों की मनोकामनाओं को पूर्ण करते हैं।

    FAQ’S 

  • प्र० शनि चालीसा क्या है?

         उत्तर – शनि चालीसा हिन्दू धर्म में शनि देव की आराधना के लिए बोली जाने वाला पाठ है।

  • प्र० शनि चालीसा के क्या लाभ हैं?

         उत्तर – शनि चालीसा का पाठ करने से घर में सुख– समृद्धि आती है, साथ ही साथ घर में धन की कमी नहीं होती है I इस पाठ के  करने से क्रोध कम आता है और मन शांत होता है I इस पाठ को करने से सभी परेशानियां दूर हो जाती है I

  • प्र० शनि चालीसा कब पढ़नी चाहिए?

         उत्तर – शनि चालीसा शनिवार  को , या किसी भी शनि दोष के समय पढ़ना शुभ माना जाता है।

  • प्र० कैसे पढ़ें शनि चालीसा?

         उत्तर – शनि चालीसा को ध्यानपूर्वक एकाग्रचित होकर पढ़ना चाहिए, और इसे निर्धारित समय पर और नियमित रूप से पढ़ना चाहिए।

  • प्र० क्या शनि चालीसा से किसी विशेष समस्या का समाधान हो सकता है?

         उत्तर – शनि चालीसा का पाठ करने से शनि दोष, शनि साढ़े साती, या अन्य शनि संबंधित समस्याओं में राहत मिलती है।

  • प्र० शनि चालीसा का पाठ किस प्रकार करें?

         उत्तर – शनि चालीसा को शुभ मुहूर्त में, शनि देव की पूजा करते हुए, नियमितता के साथ, और भक्ति भाव से पढ़ना चाहिए।

  • प्र० शनि चालीसा का पाठ कितने दिनों तक करना चाहिए?

         उत्तर – शनि चालीसा का नियमित पाठ करना हमेशा अच्छा होता है,   लेकिन किसी विशेष समस्या के समाधान के लिए उसे 40 दिनों तक  पढ़ना फायदेमंद होगा ।

Disclaimer : यह उत्तर किसी भी धार्मिक विश्वासों को आपत्ति पहुंचाने का उद्देश्य नहीं रखता है। हमारा मकसद केवल सामान्य जानकारी प्रदान करना और विविधता को समर्थन करना है, तथा हर व्यक्ति के व्यक्तिगत धार्मिक विश्वासों का सम्मान करना है। यदि किसी को इससे आपत्ति होती है, तो हम उसके लिए क्षमा चाहते हैं और इसे किसी भी प्रकार की आपत्ति के रूप में नहीं लेना चाहते हैं।

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